US-Iran तनाव और शांति वार्ता के बीच कच्चे तेल की कीमतें इस सप्ताह तेजी से बदलती रहीं। इसका सीधा असर भारतीय बाजार, महंगाई और RBI की नीति पर पड़ रहा है।
ताजा स्थिति: Strait of Hormuz में सुधार
US-Iran शांति वार्ता में सकारात्मक संकेतों और Strait of Hormuz में यातायात सुधरने से Brent Crude की कीमतें Iran संघर्ष से पहले के स्तर पर वापस आईं। इससे भारत के आयात बिल और महंगाई के दबाव में कमी आई।
लेकिन खतरा अभी टला नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति Trump ने घोषणा की कि US सेना Iran पर फिर हमला कर सकती है और Iran के तेल बाजारों, विशेषकर Kharg Island पर नियंत्रण का इरादा है। Kharg Island से Iran का अधिकांश कच्चा तेल निर्यात होता है।
भारत पर असर
- भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है
- Brent Crude में $10 की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल ₹80,000 करोड़ बढ़ जाता है
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें सरकारी नीति पर निर्भर हैं
- रुपये पर दबाव बढ़ सकता है
निवेश के लिए क्या करें?
तेल की कीमतों में अनिश्चितता के बीच:
- OMC (HPCL, BPCL, IOC): दबाव में रह सकते हैं
- Aviation (IndiGo): तेल सस्ता हो तो फायदा
- Reliance Industries: तेल महंगा हो तो E&P से फायदा
निष्कर्ष: भू-राजनीतिक स्थिति पर नज़र रखें। अगर US-Iran तनाव घटता है, बाजार और ऊपर जा सकता है।